डायरी के ये अंश कभी कागज पर लिऽे गए थे। फिर फेसबुक जैसे सामाजिक माध्यम के स्क्रीन पर। यहाँ कुछ सपने दर्ज हुए तो कुछ ऽास तारीऽें भी पेश हुईं। मन में उमड़ती-घुमड़ती कुछ बातें और सामाजिक विसंगतियों के कुछ वकायात भी। साहित्य पत्रकारिता के बाबत तो यादों के बाबत संक्षिप्त ब्यौरे। विमर्श के टीप थोड़े। बिलाशक राजनीति की कुछेक विद्रूप कथाएँ या सूचनाएं भी। कोरोना की भेंट चढ़ चुके प्रिय आत्मीय जनों की यादें साथ-साथ। कुछ अपने लिऽे-पढ़े पर भी। कहने की जरूरत नहीं कि तारीऽें भी सुनाती हैं कहानियां।