तीन कहानियों: कौन जीता; मिनी माहिन और काबुलीवाला; जिन्दा आदमी खाक का मारा तो पचास लाख का संग्रह है जो भारतीय लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद महिलाओं में असुरक्षा और पलायन के लिए संघर्ष तथा किसी घटना के पश्चात् सरकार द्वारा दिया जाने वाला मुआवजा कैसे गरीब व्यक्ति के जीवन को मृत्यु से कमतर आंकने पर मजबूर कर दिया है क्योकि सरकार के लिए शासन तंत्र में सुधार के अपेक्षा मुआवजा ज्यादा आसान मार्ग है। कौन जीता कौन हारा? भारतीय लोकतंत्र में चुनावी दंगल के विभिन्न पहलु का अवलोकन पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव का उदहारण रखते हुए। अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान राज कायम होने के बाद महिलाओं का पलायन के लिए जद्दोजहद: मिनी माहिन और काबुलीवाला के द्वारा इसे दर्शाने का प्रयास है। हमारे देश में गरीब व्यक्ति की सरकारी तंत्र के लचर व्यवस्था के कारण होने वाले मृत्यु का मुआवजा ने मानव जीवन का मूल्य उसके मृत्यु से कम कर दिया है। जिन्दा आदमी खाक का मरा तो पचास लाख का एक नया मुहावरा इस परिस्थिति को दर्शाता है। समकालीन घटनाएं किस प्रकार मानव जीवन को प्रभावित कराती है उसे दर्शाने का एक प्रयास है।
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