तवायफों के बारे में बहुत गंदी बातें फैलाई गई हैं जिसके कारण उनको हेय दृष्टि से देखा जाता है। ये बदमाशी अंग्रेजों ने शुरु की थी जिसको विस्तार के साथ पुस्तक में दिया गया है। वही धारणा आज तक चल आज तक चली आ रही है। जो उनके बारे में कहा जाता है वह सरासर झूठ और बेबुनियाद है। वे उच्च शिक्षित थीं। अधिकतर शायर थीं। वे चरित्रवान थी। देशभक्त थी। भारतीय संस्कृति की रक्षक और शिक्षिकाऐं थी “तहजीब रक्षक वे कोठेवालियाँ” उसी बेबुनियाद और झूठी धारणा को दूर हेतु और उन महान देशभक्त कलाकारों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि देने कम लिये लिखी गई है।