पहली किताब किसी लेखक की मंजिल तो नहीं किंतु सफर में मील का पत्थर जरूर होती है। तेरह किस्से किरण शुक्ला जी के लेखन सफर का वही पत्थर है। किरण शुक्ला मूलतः उत्तरप्रदेश की निवासी हैं। पिता जी के भारतीय वायुसेना में कार्यरत होने के कारण भारत के विभिन्न राज्यों में इनकी शिक्षा दीक्षा हुई और इन्होंने नागपुर यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की। विवाह पश्चात् विगत 28 वर्षो से अपने परिवार के साथ लखनऊ में रह रही हैं। इनके पति जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया में व दोनों पुत्र कॉरपोरेट में अलग अलग शहरों में कार्यरत हैं। किरण जी का मानना है “यदि कविता दिल से निकली आवाज़ है तो कहानियाँ आसपास के वातावरण को देखकर ज़ेहन में उभरते ख्याल हैं जो दिल की परतों पर अपनी छाप छोड़ जाते हैं। ये छाप लफ़्जों में ढ़लकर कहानियों का रूप अख्तियार कर लेती हैं। “तेरह किस्से” इनका पहला एकल कहानी संग्रह है किंतु ये आभासीय पटल पर लिखती आई हैं। किरण शुक्ला कलामंथन मंच से मुख्य रूप से जुड़ी हैं तथा मंच की हिन्दी टीम का अभिन्न अंग हैं। इस संग्रह की सभी कहानियाँ मानव जीवन विभिन्न पहलुओं के इर्द गिर्द घूमती हैं।