कोई पद प्रतिष्ठा या नौकरी प्राप्त कर लेना अथवा राजनीति या बिजनेस में एक बड़ा मुकाम हासिल कर लेना जीवन की सफलता नहीं है यह सफलता का एक भाग हो सकता है। जीवन की सफलता का तात्पर्य है कि व्यक्ति अपने स्वभाव के अनुसार कर्म करते हुए अपने परिवार समाज व राष्ट्र के समस्त दायित्यों का निर्वहन करे। व्यक्ति जिस क्षेत्र में कार्यरत है उसमें उसे पूर्ण आनंद और खुशी हमेशा मिलती रहे कर्तव्य पथ पर आने वाली बाधाएं उसके लिए फुटबॉल के खेल में गेंद की तरह हों जिनका सामना करते हुए कर्तव्य बोध फोकस स्वाभिमान उत्साह व आशा का आलम हमेशा उसके साथ रहे। यह उसकी सच्ची सफलता है। इस पुस्तक में मैंने ऐसी सच्ची व पक्की सफलता को प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों युवाओं और उद्यमियों को मार्गदर्शन दिया है।
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