‘ठूँठा पेड़ : मुट्ठी भर जज़्बात’ कविता संग्रह मानव मन की संवेदनाओं को नितांत ही सरल सजीव अपरिमार्जित अपक्व बुनियादी एवं साधारण ढंग से प्रस्तुत करने का एक प्रयास है जहाँ कवयित्री का उद्देश्य मानव चेतन को हल्के से छू कर हृदय के मृदु भावनाओं को जागृत करने का है। प्रगतिवाद युग में थोड़ा समय निकाल मानव को उनके मनोभावों के समीप लाने की एक कोशिश है ये किताब जिसमें जज़्बात को सर्वोपरि रखा गया है।कवयित्री का स्वयं का विश्वास है कि आधुनिक समय में जब मानव सुलभ भावनायें कंक्रीट में दफ़न होते जा रहे है तो उनके ऊपर से सभी परत उतार अपने वास्तविक नैसर्गिक रूप में मनस में जगाने की आवश्यकता है। इस किताब के द्वारा ये कोशिश की गयी है कि ये कभी आपको गुदगुदाये तो कभी हँसाये कहीं अनायास ही अश्रु बहाने को मज़बूर कर जाये तो कहीं सोच के सागर में गोते लगाने छोड़ दे कभी अथाह चिंता में डाल दे तो कभी सभी चिंताओं से मुक्त कर स्वच्छंद कर जाये कहीं अन्तर्द्वन्द्व में उलझा जाये तो कभी प्रतिबिंब बन सच के सभी तह खोल जाये कहीं अथाह प्रेम सी निर्झर बहे तो कहीं समाज का आईना बन लेखा जोखा कर जाये।