ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाएं( एथलेटिक्स) को सभी खेलो की जननी भी कहा जाता है |एथलेटिक्स का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि इस मानव सभ्यता का। मनुष्य के अंदर दौड़ना कूदना उछलना फेंकना आदि यह सब जन्मजात क्रियाएं पाई जाती हैं और आदि मानव इन्हीं सब मूलभूत क्रियाओं के माध्यम से अपना शिकार भोजन तथा जंगली और खूंखार जानवरों से अपना बचाव तथा प्राण रक्षा करने में सफल होता था| कालांतर में यह सभी क्रियाएं मनोरंजन का साधन भी बनी जिसमें लोगों ने स्वेच्छा से भाग लेना शुरू किया और बिना किसी दबाव के आत्म संतुष्टि का अनुभव किया |इतिहास गवाह है कि एथलेटिक्स के महत्व को सर्वप्रथम यूनान के लोगों ने समझा और 776 ईसा• पूर्व पुराने ओलंपिक खेलों में इन मूलभूत क्रियाओं दौड़ कूद प्रतियोगिताओं को शामिल किया तब से आधुनिक ओलंपिक गेम 1896 ईसवी तक एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उतार-चढ़ाव के साथ देखे गए और तब से आज तक उत्तरोत्तर स्वस्थ्य एथलेटिक्स ओलंपिक गेम में संचालित हो रही है| एथलेटिक्स की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है विश्व का कोई भी स्कूल कॉलेज महाविद्यालय विश्वविद्यालय अपने वार्षिकोत्सव कार्यक्रम स्पोर्ट्स डे आदि अवसरों पर एथलेटिक्स प्रतियोगिता का आयोजन जरूर करता है और विद्यार्थी गण भी इसमें बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करते हैं। शारीरिक शिक्षा विषय पर आंग्ल भाषा में किताबों का दुकानों पुस्तकालयों में अंबार सा लगा है विशेषकर भारत के हिंदी भाषी राज्यों उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़बिहार झारखण्ड पंजाब हरियाणा राजस्थान की शारीरिक शिक्षा विषय की विद्यार्थियों को हिंदी में पुस्तकों की अनुपलब्धता के कारण विषय वस्तु को पढ़ने एवं समझने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इसी भावना से प्रेरित होकर डॉ० राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय अयोध्या के बी.ए. तृतीय वर्ष प्रयोगात्मक को ध्यान में रखकर इस पुस्तक ट्रैक एंड फील्ड रचना एवं मार्किंग की रचना की गई है ।यह पुस्तक भारतवर्ष के अन्य विश्व विद्यालयों में संचालित पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगी ।पुस्तक में अति लघु उत्तरीय प्रश्नों का समावेश उनके हल के साथ किया गया है जिससे विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नों का उद्देश्य भी हल होगा । पुस्तक की रचना विभिन्न संदर्भ ग्रंथों पुस्तकों एवं इंटरनेट सामग्री से प्राप्त की गई है यथासंभव सरल एवं साधारण बोलचाल की भाषा में रचना की गई है और आवश्यकतानुसार अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग किसी तथ्य को बोधगम्य बनाने में प्रयोग किया गया है । मैं उन सभी विद्वानों लेखकों और प्रकाशकों का हृदय से आभारी हूं जिनकी पुस्तकों को पढ़ने एवं समझने के साथ स्वर्गीय माता -पिता और बड़े भाई रमेश चंद्र धर्मपत्नी श्रीमती मनीषा श्रीवास्तव का भी हृदय से आभारी हूं जो प्रेरणा स्रोत रहे हैं| इस पुस्तक को मूर्त रूप देने में टंकक एवं कंप्यूटर ऑपरेटर रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर राकेश कुमार गोला का भी विशेष योगदान रहा है |अंत मे यह पुस्तक कैसी है समझ के अनुसार है कि नहीं इसका निर्णय छात्र गण पाठक गण ही करेंगे इस पुस्तक को अपनी पुस्तक समझकर सभी प्रकार के सुझावों एवं आलोचना से मुझे अवगत कराएंगे और मैं इसको स्वागत पूर्वक स्वीकार कर लूंगा और सुधार करूंगा | मैं अंत में प्रकाशक प्रबंधक एवं समस्त कार्मिकों का हृदय से आभारी हूं जिनके अथक प्रयास एवं परिश्रम से इस पुस्तक को साकार रूप मिला एवं यह सुधी पाठक गण एवं विद्यार्थियों तक पहुंच सकी ।