बारह दिसंबर उन्नीसौ अइतालिस को नगर गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) के मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मा। विगत छह दशकों से अधिक रंगमंचीय नाट्य विद्या कला क्षेत्र में संघर्षरत सक्रिय हूं। संयोगवश चूंकि स्वर्गीय पिता श्री राधेलाल कृष्णा जी भी अपने नगर की सन उन्नीससी तीस से सक्रिय दि स्टूडेंट्स ड्रामेटिक क्लब * सबसे प्राचीन प्रतिशिष्ठ नाट्य संस्था में रंगमंचीय नाट्य विद्या कला के प्रति पूर्ण समर्पित कुशल निर्देशक के साथ अभिनेता भी थे तो मैं भी बाल्यकाल से ही अपने पिताश्री जी और उनके सभी अनन्य नाट्य प्रेमी रंगकर्मियों के बीच यदाकदा नाट्य कला संबंधित हो रही वार्तालाप गतिविधियों के साथ रात्रि में पूर्वाभ्यास स्थल पर उन सभी रंगकर्मियों का अभिनय निहारने वास्ते पिताश्री जी को उन सभी कलाकारों को अभिनय में दीक्षित करने हेतु दिशानिर्देश देते हुए अक्सर मैं छिपते छिपाते टकटकी लगाए निहारने के साथ बहुत ही एकाग्रता से सुनता रहता बस इसी प्रवृत्ति के कारणवश मुझे भी धीरे धीरे नाट्य अभिनय के प्रति रुचि बढ़ती ही गई और एकांत में मैंने भी उन सभी रंगकर्मियों के अभिनय का पूर्वाभ्यास रूप में नित्य अनुसरण करना उन दिनों प्रारंभ भी कर दिया।दिनांक बारह दिसम्बर उन्नीससौ सडसत से मैंने भारतीय स्टेट बैंक मुख्य शाखा संसद मार्ग नई दिल्ली में लिपिक पद रूप पर ग्रहण किया तो तब से ही राजधानी दिल्ली नाट्य रंगमंच क्षेत्र की अनेकों नाट्य संस्थाओं के साथ साथ आकाशवाणी दिल्ली नाटक विभाग एवं दिल्ली दूरदर्शन नाटक विभाग में अभिनय परीक्षाओं में अभिनेता रूप में उत्तीर्ण होकर मैंने बहुत से नाटकों टैलीफिल्मों धारावाहिकों लघु फिल्मों विभिन्न सामाजिक समस्याओं पर आधारित विज्ञापनों की प्रस्तुतियों में चरित्र अभिनेता रूप में अनेकों गुणी वरिष्ठ प्रतिशिष्ट निर्देशकों के सानिध्य में अभिनय और साथ ही अपने नगर में ही इच्छुक नवागंतुक रंगकर्मियों को नाट्य कला विद्या में प्रशिक्षित करने हेतु चार बार दुई माह नाट्य प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर कुछ नाटकों की प्रस्तुतियों में अभिनय के साथ निर्देशन करने का भी अनुभव प्राप्त हो सका। दिनांक इक्कतीस मार्च सन दो हजार एक को मैने भारतीय स्टेट बैंक जंगपुरा शाखा नई दिल्ली से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के उपरांत में भी स्वतंत्र रूप से व्यवसायिक नाट्य कला क्षेत्र के साथ फिल्म उद्योग में पदार्पण कर अभिनय निर्माण निर्देशन क्षेत्र में बहुत से प्रशिक्षित युवा निर्देशकों की कुछ निर्मित फीचर फिल्मों में चरित्र अभिनेता रूप में अभिनय करने का अवसर भी प्राप्त हुआ साथ ही इसी दिशा में दूरदर्शन हेतु सन दो हजार दो में पर्यटन स्थल आधारित कथानकों पर दो लघु फिल्मों का निर्माण निर्देशन एवं सन दो हजार सात से कुछ कुछ अंतराल उपरांत आकाशवाणी प्रभाग दिल्ली बाहरी निर्माता निर्देशक रूप में कुछ धारावाहिकों का निर्माण निर्देशन करने का अनुभव भी प्राप्त हो सका है और आज तक सक्रिय हूं संघर्षशील भी।