एक कमजोर इरादों वाला युवक आलसी युवक बहानेबाज। जिन्दगी को नकारात्मक नजर से देखने वाला युवक। जिन्दगी जीने के बजाय जिन्दगी क्या है क्यों है जैसे प्रश्नों में उलझने वाला युवक।पानी की बेपरवाह धार में छोड़े हुए नाव की तरह। जिन्दगी जिधर ले जाए कोई लक्ष्य नहीं कोई तमन्ना नहीं। फिर सगाई इश्क शादी और बच्चे। क्या उसकी जिन्दगी में ऐसा कोई निर्णायक मोड़ आयेगा जो उसकी सोच और किस्मत को बदल देगा?‘तुझसे नाराज़ नहीं जिन्दगी’ एक ऐसे ही युवक के संघर्ष और जिजीविषा की कहानी है।