सुना है कि प्रायः कवि अपने लेखन की शुरुआत प्रेम कविता से करते हैं लेकिन मेरे साथ ऐसी बात नहीं। मेरे लेखन का आरंभ नारीवादी कविताओं से हुआ। हालांकि तब उस छोटी सी उम्र में किसी वाद से परिचय नहीं था बस जो अपने आसपास देखा वह लिखती गई। परन्तु शनै: शनै: समय के पंखों ने कल्पना की उड़ान भरना सिखला ही दिया। कुछ कच्ची उम्र की सुकोमल भावनाएं और कुछ सामाजिक विरोधाभासों के प्रति क्षोभ दोनों साथ-साथ कोरे पन्नों पर उकेरते रहे।