किसी किताब के लिखे में शब्दों से परे किताब लिखने वाले के जीवन का काल क्रम संकलित होता है यह किताब ''तुम आसमान लिखते हो मैं मिट्टी पढ़ती हूँ'' में भी संकलित है; समय और समय से परे का बहुत कुछ―बहुत कुछ जो कविता होते जीवन हो जाए जीवन होते मृत्यु तक हाथ पकड़ छोड़ आए। यह किताब रोज़मर्रा के हुए किए की तरह ही है जैसे हम हर रोज़ एक जीवन जी लेते हैं एक दिन बीत जाता है एक रात बीत जाती है एक कविता घटित होती है वैसे ही। जीवन आखिरी है भी क्या बग़ैर कविताओं के?