भावुक मन की कल्पनाओं का सृजन एक अन्तरात्मा की आवाज होती है कभी कभी वो मन मे ही रह जाती है और कभी कभी लेखनी के रूप में प्रकट हो जाती है मन की धाराओं के प्रवाह अविरल चलता रहता है और नई नई आशाओं को जन्म देता है। इस प्रकार अनेक विचारों भावों जिंदगी के अनेक रूपों पहलुओं पर आधारित मन कुछ न कुछ व्यक्त करता रहता है। उन्हीं भावों के रूप में * तुम बिन* यह काव्य संग्रह है। जिंदगी में तमाम लोग मिलते हैंबस वही याद आते हैं जो प्यार से बात करते हैं। आपका डॉ. सदन वर्मा
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