जीवन का प्रवाह हमारे सपनों ख्वाहिशों आशा और आशंकाओं से एकदम असंपृक्त होता है। उसे हमारा कुछ भी छूकर नहीं गुजरता बस वह गुजरता रहता है बहता रहता है अपनी दिशा में। कुछ खुशकिस्मत लोगों के साथ वह समानांतर चलता है लेकिन ज्यादातर मामलों में इसकी दिशा अलग ही हुआ करती है। ऐसा निष्कर्ष निकालना शायद भाग्यवादी या नियतिवादी होना कहलाएगा लेकिन ये सच है कि यदि हमने जीवन की ऊँगली थामने का साहस दिखाया तो वह हमें वहाँ ले जाएगा जो जगह हमारे लिए सबसे ज्यादा मुफीद होती है। यदि ये साहस नहीं दिखाया तब भी वो आपको वहीं ले जाएगा लेकिन इस खींचतान में आप बहुत सारा वक्त और ऊर्जा उस प्रवाह से संघर्ष करने में जाया कर देंगे।