हृदय के भावों को लिखना खुद से बातें करना जैसा होता है। जब मैंने लिखना शुरू किया तो मैंने अपने भीतर के द्वंद्व को जाना और प्रत्यक्ष उसका अनुभव किया। जीवन के विभिन्न क्षणों में प्रेम विरह करुणा वेदना उमंग और उत्साह से मेरा साक्षात्कार मेरी कविताओं के माध्यम से ही हुआ। कालजयी और स्थापित रचनाकारों की रचनाओं से जहां एक तरफ सामयिक परिवेश एवं जीवन दर्शन का बोध हुआ तो वहीं दूसरी तरफ अन्तर्मन से उठते भावों की अभिव्यक्ति को एक दिशा मिली जो स्वयं को समझने में सहायक सिद्ध हुई। व्यक्तिगत रूप से प्रतिपल यही लगता है कि किसी दूसरे को जानने एवं समझने से पूर्व स्वयं को जानना आवश्यक है और जितना हम स्वयं को समझ लेते हैं उतना ही आसान हो जाता है किसी दूसरे की मनोदशा एवं परिस्थिति को समझ पाना। स्वयं को जानने एवं समझने की इस यात्रा में जीवन अभूतपूर्व रूप में नई दिशा और ऊंचाइयों को प्राप्त होता दिखाई पड़ता है। हम सामाजिक नैतिक एवं व्यवहारिक रूप में सहज होते चले जाते हैं।साहित्य की कसौटी पर भले ही यह काव्य संग्रह निम्नतम हो किन्तु यह मेरे स्वयं के अनुभव की अभिव्यक्ति है। आशा है काव्य संग्रह 'तुम जो मिले तो' के शब्द आपके हृदय को छूकर मुझे आशीर्वाद प्रदान करेंगे और मेरी जीवन यात्रा को सफल करेंगे।
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