आचार्य राजेश कुमार का उपन्यास ''तुम कौन-सी पाटी पढ़े हो लला'' पहली दृष्टि में एक सरल सी प्रेम कहानी लगती है लेकिन जैसे-जैसे पाठक इसमें डूबता है उसे यह अनुभव होता है कि यह कहानी प्रेम के नाम पर लुटती भावनाओं बिखरते भरोसे और टूटते सपनों की कथा है जो हमारे समय का कड़वा सच कहने का दुस्साहस करती है। यह केवल एक प्रेम कहानी नहीं बल्कि आधुनिक प्रवासी जीवन की विडंबनाओं और मानवीय रिश्तों की जटिलताओं को गहराई से छूती है। उपन्यास अपने भीतर जीवन की जटिलताओं विस्थापन की पीड़ा प्रेम की विफलताओं और सामाजिक विरोधाभासों को समेटे हुए है।राजेश कुमार की यह कृति उस युवा पीढ़ी की कहानी है जो अपनी धरती छोड़ अपने सपने सजाने विदेश जाती है और वहाँ न केवल भौगोलिक बल्कि मानसिक और भावनात्मक विस्थापन का भी शिकार होती है। ...रोहित कुमार हैप्पी