काव्य संग्रह तुम पलाश मैं फूल तुम्हारा प्रेमाभिव्यक्ति और प्रेमासक्त भावनाओं की वह पराकाष्ठा है जहाँ भौतिक अनुपस्थिति गौण है और हृदयगामी सान्निध्य शाश्वत है। संवेदना से उपजी कविता के हर शब्द में छिपा दर्द विरह की तड़प के साथ ईश्वर में समाहित अंश के प्रति कृतज्ञता मान- सम्मान प्रेम सभी भावनाओं को स्वयं में समेटे हुए है। आशा है कि पाठक भी संवेदनाजन्य भावनाओं की अनुभूति करने में समर्थ रहेंगे।