उद्भ्रांत के काव्य की जो उड़ान है वो बड़ी महत्वपूर्ण है। हमारे समय में कोई ऐसा कवि है जो महाकवि निराला से सीधे अपना रसस्रोत जोड़ता है जिसकी जड़ें वहाँ तक गयी हुई हैं और परंपरा में हस्तक्षेप करने की आकुलता से कोई कवि हमारे मिथकीय संसार की पुनर्रचना भी करने का प्रयत्न कर रहा है। और ‘अनाद्यसूत्त को पढ़ कर मुझे यह अनुभव हुआ कि उद्भ्रांत केवल वस्तुजगत के ही कवि नहीं हैं बल्कि आत्मगत प्रकृति अभ्यंतरीकरण और ईश्वरविहीन आध्यात्मिकता के मनीषी सर्जक भी हैं’। - आनन्द सिंह
Piracy-free
Assured Quality
Secure Transactions
Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.