बैजनाथ प्रसाद वमनयां जी ने अपनी पुस्तक उजड़ा चमन में धर्म और कर्म को प्रधान माना है। मनुष्य की पहचान काम से होना चाहिये ना कि जाति से मानव समाज में पीड़ा घुटन टूटते रिश्ते यानि जीवन के हर उतार-चढ़ाव को वमनयां जी का अपने भावो को कविताओं में डालने का अच्छा प्रयास है। इनकी भावनायें इस पुस्तक में आपको पढ़ने के लिये विवश करती है कि इनका जीवन कितना संघर्षपूर्ण रहा है। कभी हार न मानने की - प्रेरणा उजड़ा चमन नामक पुस्तक में व्यक्त की है।