यह एक ऐसा ह्दयस्पर्शी उपन्यास है जो लोगों को सोचने को मजबूर करता है कि आज के युग में भी कितने भोले लोग मिल जाते हैं जो भगवान को देखने के चक्कर में अपने शरीर ही नहीं आत्मा को भी पाखंडियों के हवाले कर देते हैं। इस उपन्यास की भाषा शैली अत्यंत ही रोचक है|