श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित वृहदाकार उपन्यास कुल 10 खंडों में लिखा गया है लेकिन यहां इस खंड में श्रीकृष्ण कथा के दो उपन्यास जनपथ पर एवं जलयात्रा एक साथ दिए गए हैं। उपन्यास के पूर्वार्ध में मथुरावासियों का रेगिस्तान से होते हुए द्वारका जाने का कष्टपूर्ण वर्णन है और उत्तरार्ध में श्रीकृष्ण समूचे भारत के लिए मुक्तिदाता बनकर उभरते हैं और उनके नीतिज्ञ होने की बात उजागर होती है।.
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