इस काव्य संग्रह का मुख्य उद्देश्य वन संरक्षण के महत्व को सामान्य जन-मानस के मध्य रखना है जो वैज्ञानिक भाषा की पहुँच से दूर है। वेदपूर्व काल से प्रकृति मनुष्य के लिए जिज्ञासा का विषय रही है। इसी कारण वेदों से लेकर आज तक कविता में वह न केवल छायी रही बल्कि ऐसा लगता है प्रकृति के प्रति संवेदना बिना कोई भी कवि पूरा होता ही नहीं।