'वेद-बच्चों जैसे दिमाग की उपज है।' इस कथन पर आप विश्वास करेंगे? लेकिन वस्तुतः यह कथन उतना ही सत्य है जितना सूर्य का पूर्व से निकलना। वेदों की रचना ऋषि-मुनियों ने की है। ऋषि-मुनियों के हृदय बच्चों की तरह निर्मल होते हैं। वे किसी बात को जैसा देखते हैं वैसा ही शब्दों में अभिव्यक्त कर देते हैं। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि वेद बच्चों जैसे निर्मल मन वाले ऋषियों की सत्य वाणी है। ऋग्वेद विश्व का प्राचीनतम ग्रंथ है। इसके बारे में कहा गया है-<br>यावत्स्थास्यन्ति गिरयः सरितश्च महीतले। तावऋग्वेदमहिमा लोकेषु प्रचरिष्यति।।<br>अर्थात् जब तक पृथ्वी पर पर्वत स्थिर रहेंगे और नदियां बहती रहेंगी तब तक ऋग्वेद की महिमा संसार में फैली रहेगी।<br>वेदों में विभिन्न कथाओं के माध्यम से ब्रह्मांड की उत्पत्ति ब्रह्म ईश्वर प्रकृति पशु-पक्षी मनुष्य की उत्पत्ति प्रलय समाज काल संस्कृति ग्रह नक्षत्र राजा प्रजा स्वर्ग नरक यम पाप पुण्य जीवन मृत्यु आदि का विहंगम वर्णन किया गया है। वेद 'गागर में सागर' की भांति हैं। कुछ अक्षरों से मिलकर बने छोटे से मंत्र में ब्रह्मांड जैसी व्यापकता के दर्शन होते हैं। दिव्य ज्ञान के इसी भंडार में से कुछ कथाओं को पिरोकर यह पुस्तक तैयार की गई है।