काव्य मंच के यशस्वी कवि नवगीतकार शिवाकान्त मिश्र ''विद्रोही'' का नवगीत दीर्घा से ओज में पदार्पण अवश्य मंगलकारी सिद्ध होगा। ओज का अपना अलग तेवर है ओज की अपनी विशिष्ट शैली है और रसानुभूति की अलग महिमा है। विद्रोही जी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने वीररस प्रधान काव्यकृति ''वीरभद्र'' में उपर्युक्त सभी शर्तों का सम्यक निर्वाह किया है। ''वीरभद्र'' का कथा सौष्ठव घटनाक्रम की स्वाभाविकता तथा सहज दृश्यांकन वीर रस के परिपाक हेतु सर्वथा अनुकूल है। कवि चरित्र चित्रण में दक्ष हैं।
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