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About The Book
Description
Author
“विस्मृति के विरुद्ध संघर्ष भी सामाजिक क्रान्ति की लड़ाई का एक अहम मोर्चा है। कभी-कभी क्रान्तियों की पराजय या संकट के दौरों में किसी भी देश का मेहनतकश अवाम अपनी परम्परा को इतिहास को अपने नायकों और उनके विचारों को भुलाकर अपने स्वप्नों से लक्ष्यों-आदर्शों से भी विमुख हो जाता है उन्हें भी भुला देता है और उसे गतिरोध की स्थिति जकड़ लेती है। गतिरोध की इसी स्थिति को तोड़ने के लिए भगतसिंह ने “क्रान्ति की स्पिरिट ताज़ा” करने की बात की थी “ताकि इंसानियत की रूह में हरकत पैदा हो।”भारतीय इतिहास के (और विश्व इतिहास के भी) एक अभूतपूर्व कठिन दौर में इंसानियत की रूह में हरकत पैदा करने के लिए क्रान्ति की स्पिरिट ताज़ा करने के लिए भारतीय जन-मुक्ति संघर्ष के महान नायक शहीदे-आज़म भगतसिंह के विचारों को आज बार-बार पढ़ने की ज़रूरत है इन्हें हर जीवित हृदय तक पहुँचाने की ज़रूरत है।”