सामाजिक परिवेष जब रूढ़िवादी चिन्तन से मुक्त होता है तब विज्ञान की दुनिया में पहुँचता है। अनेक वैज्ञानिक परिणाम स्वयं में रहस्यों से युक्त होते हैं। सर आइजक न्यूटन से जब कभी गुरूत्वाकर्शण की व्याख्या करने के लिए कहा जाता था तब वे बार-बार यही कहकर अपना उत्तर पूरा कर देते थे ’............... कुछ तो है।’ अतः वैज्ञानिक सत्य जो षर्तों पर आधारित होते है कमी की पुर्णता को प्राप्त नहीं कर सकते हैं। विज्ञान की दुनिया में प्रायः यह कहा जाता है कि एक समस्या का वैज्ञानिक समाधान अनेकानेक वैज्ञानिक समस्याओं को उत्पन्न कर देता है जिसके कारण हम इस निश्कर्श पर पहुँच जाते है कि ज्ञान की प्रायोगिक और दृष्य यात्रा का नाम विज्ञान है। - इसी पुस्तक से