: विज्ञान शिक्षण आज से नहीं अपितु अतीत से समाज की आवश्यकता रही है।विज्ञान ही वह विषय है जिसके माध्यम से हम विभिन्न घटनाक्रमों परिघटनाओं को सही रूप से व्याख्या करवाने में सफल हो पाए।विज्ञान के बगैर हम मानव जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकतेविद्यार्थियों को यदि प्रारंभिक काल में रोचक विधियों के माध्यम से विज्ञान का शिक्षण करवाया जाए तो निश्चित रूप से वह विषय उनके लिए उदासीन न होकर जिज्ञासा का कारण रहेगा। विज्ञान शिक्षण से विद्यार्थियों में तर्कशक्ति कल्पनाशीलता का विकास होता है। वास्तव में विज्ञान शिक्षण सुव्यवस्थित समाज की संरचना में बहुत ही उपयोगी विषय है।