...हिन्दी कथा-लेखन में लब्ध ख्यात सिद्धहस्त कथा लेखक ललन तिवारी की नवीनतम ग्यारह चयनित कहानियों का संग्रह है इनका चौथा कहानी संग्रह ‘विमर्श’। इस संग्रह से गुजरते हुए यह सहज ही समझा जा सकता है कि इन्होंने एक अनोखा शिल्प अपनाया है इन कहानियों के लिए। इनके कथन में जहाँ तत्सम शब्दों का प्रचुरता से आरोपन है वहीं स्थानीय बोल-चाल की शब्दावलियों की घुसपैठ भी है। लेकिन वे अपने निर्दिष्ट गंतव्य से भटकती नहीं है। पाठक के एक वर्ग को ऐसी उत्फुल्लता आकर्षण का कारण बनता है लेखक इसके प्रति पूर्णतः सचेत है। ‘विमर्श’ कहानी संग्रह में यद्यपि सारी कहानियाँ आज की विभिन्न परिस्थितियों का सफल प्रतिनिधित्व करती हैं लेकिन खासकर कहानी जोगी के अंगनवा रामा नकबेसर कागा ले भागा कालाकोट सरकारी नीतियों से उत्पन्न भयावह परिस्थितियों को उजागर करती हैं।... इस तरह इनकी कहानियों से गुजरेंगे तो आप सहज ही इस निष्कर्ष पर पहुँचेंगे कि आज के समय में व्याप्त सत्ता के एकांगी सोच के चलते बदले एवं असहिष्णु वातावरण के बीच विमर्श का प्रकाशन कितना आवश्यक एवं समीचीन है। --गोपाल प्रसाद