विवाह की चर्चा चलते ही हर युवक/युवती के चेहरे पर शर्म की लालिमा छा जाती है। दिल में तरह-तरह के अरमान सजने लगते हैं। हर युवक/युवती का यही सपना होता है कि उसे खूबसूरत शिक्षित व कुलीन पति/पत्नी के साथ ही अच्छाघर-परिवार मिले। साथ ही ज्यादातर युवतियों की इच्छा होती है कि उनकी शादी किसी बड़े घर और अच्छी फैमिली में हो जहां पर उन्हें हर प्रकार का सुख मिले और मायके की याद न आये। लेकिन इधर शादी में देरी हुई नहीं कि उन पर उंगलियां उठनी शुरू हो जाती हैं। कहीं लड़का लड़की मंगली तो नहीं? स्वभाव व रंग-रूप में कोई कसर तो नहीं जरूर चाल-चलन अच्छा नहीं होगा आदि ढेर सारी बातें उठनी शुरू हो जाती हैं जितने मुंह उतनी बातें। पर क्या वैवाहिक समस्याओं के लिए लड़का-लड़की दोषी हैं? नहीं! हर महत्वपूर्ण कार्य को अंजाम देने में कई तरह की कठिनाइयां आती हैं पर इंसान सभी मुश्किलों से लड़ता हुआ अपनी मंजिल को प्राप्त कर ही लेता है। ठीक उसी प्रकार शादी में लाख रुकावट आती हो पर अंततः विवाह हो ही जाता है अतः इन कठिनाइयों के दौरान लड़के-लड़कियों को कोसना या उनके भाग्य का रोना रोना कोई अकलमंदी की बात नहीं है। आपको सिर्फ उपाय करना है और यह उपाय और समाधान लेकर आई है पं. कमल श्रीमालीजी द्वारा रचित पुस्तक विवाह में बाधा'''' कारण और निवारण । इस पुस्तक में विवाह से संबंधित अनेकों समस्याओं का समाधान सरल व कारगर ढंग से किया गया है। जिन्हें आप देख व मनन कर अपने बच्चों के विवाह में आने वाली परेशानियों से काफी हद तक बच जायेंगे।