लेखक मेरे स्व. पिता श्री डी कोडवानी जी ने पुस्तक में अपने जीवन काल मे जो भी घटनाए घटी तथा गुरुजी श्री आनंदमूर्ती जी के साथ जुड़ने के बाद समय समय पर जो ईश्वरीय अनुभुती का अहसास हुवा तथा हर मुसिबत मे कैसे रास्ता मिलता गया कैसे उन्होने एक वृहद के आकर्षण को महसुस किया। इस सब के बारे मे लेखक ने अपने अनुभव इस पुस्तक के माध्यम से लोगो तक पहुँचाने का प्रयास किया है।