“वो कहती थी“ मेरे रिश्तों व उससे जुड़े अहसासों से भरा मेरा पहला काव्य संग्रह है। दरअसल ये काव्य संग्रह नहीं है ये मेरी जीवन की उस यात्रा के संस्मरण है जो अच्छे दिनों का पर्याय हुआ करते थे लेकिन कहते हैं कि सारी दुनिया दुखी क्यों ? क्योंकि दूसरा खुश क्यूं है। बस दुनिया की नज़र लग जाने से वो ’रिश्ता’ एक अहसास गलतफहमी की भेंट चढ़ गया। एक राह पर चलने वाले दो दिल एक जान अब दो राहें और दो जिस्मोजान बन गये और राहें अलगअलग हुईं तो उसने मुझसे शिकायत किये बगैर मुझे बेवफा ठहराने की कोशिशें की। वो बेवफा कहें मुझे जिसे मैं वफा कहूँ।मैं बदनसीब होकर अपने मुकद्दर को क्या कहूँ।।