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About The Book
Description
Author
जी हाँ यह अनुत्तरित कहानी संग्रह ‘यक्ष प्रश्न’ का समीक्षण शीर्षक है जिसमें लेखिका पाँच कहानियों के साथ यक्ष प्रश्नो की सूची लिये पाठकों के संवाद करने के लिये लालयित हैं; यूँ तो भारतीय साहित्य में यक्ष प्रश्नों का साक्ष्य महाभारत महाकाव्य के अन्तनिर्हित संवाद प्रसंगों में पाये जाते हैं जैसी कि एक स्थान पर तो धर्मराज युधिष्ठिर प्रश्नों का उत्तर देकर प्रश्नकर्ता यक्ष को प्रसन्न करते हैं और अपने चारों भाइयों को जीवन वरदान दिलाते हैं दूसरे स्थान पर द्रौपदी संपूर्ण राजसभा के अन्दसर घसीटकर लायी जाती है निर्वस्त्र करने के लिये और उस अपमानित अवस्था में वो जब प्रश्नों की बौछार करती है तो सभी प्रश्न यक्ष प्रश्न ही होते हैं जो वहाँ राजसभा में अनुत्तंरित रह जाते हैं वहाँ किसी के पास उत्तर होते हुये भी नहीं होते हैं ये यक्ष प्रश्न होते ही ऐसे है कि जिनके उत्तर वर्तमान के पास नहीं होते; वो सभी भविष्य के गर्भ में होते हैं और भविष्य अनंत होता है इसी प्रकृति की तरह तभी वो ये प्रश्न जो लेखिका ने अपनी कहानी संग्रह में उठाये हैं यह सब युगबोध हैं जो पहले भी थे और आने वाले युगों तक रहेंगे बस अन्तर इतना होगा कि देश-काल-परिस्थिति के युगबोध कथाओं की विषय वस्तु रूपान्तरित होते हुये साहित्य साधकों के सम्मुख प्रस्तुत होते रहेंगे I - राजकिशोर शुक्ली ‘राज’