क्या लड़का होना इनता जरूरी है और लड़की इतनी गैर-जरूरी? लेकिन बस अब कोई प्रश्न नहीं। हम जा रही हैं अपनी चीख़ों से आपको परेशान किए बिना शांति के साथ जा रही हैं क्योकि हमें पता है आपने पहले से ही हमारे लिए कब्र खोदकर तैयार राखी है। आपका इतना एहसान हम कभी न भूलेंगे। यह कहानी है कोख में पल रही दो भ्रूण हत्याओं की - दीदी और छोटी की। उनका वार्तालाप और छोटी के जिज्ञासा भरे प्रश्न आज की व्यवस्था पर करारे व्यंग्य हैं। ये आज भी अनुत्तरित हैं।