लेखक 1969 बैच के आई. आर. एस. अधिकारी थे जिन्होंने आयकर विभाग में अपने 37 साल के कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया खासकर अन्वेषण विभाग में। जब वे धनबाद में इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स में डॉक्टरेट छात्र थे तब उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा दी और अपने पहले प्रयास में ही उन्हें भारतीय राजस्व सेवा में चुन लिया गया। उसके पहले उन्होंने उसी संस्थान से भूविज्ञान में एम. एस सी. डिग्री प्राप्त की थी। उनका जन्म 1946 में रॉबर्ट्सगंज में हुआ था जो बाद में उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले का प्रशासनिक मुख्यालय बन गया। उनका हमेशा विद्या और शिक्षा के प्रति बहुत झुकाव था और उन्होंने सेवा में रहते हुए बॉम्बे विश्वविद्यालय से एल. एल. एम. सहित कई डिग्रियां हासिल कीं। 2015 में उनके निधन के समय वह डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लखनऊ में डॉक्टरेट छात्र के रूप में नामांकित थे। इस उपन्यास का प्रारंभिक मसौदा उनके द्वारा वर्ष 1990 में कोलकाता में आयुक्त के रूप में पोस्टिंग के तुरंत बाद संकलित किया गया था। कई दौर के संपादन और प्रूफ रीडिंग के बाद पांडुलिपि का अंतिम संस्करण 90 के दशक की शुरुआत में पूरा हुआ था।