प्रेम के विषय में युवा वर्ग जितना उत्सुक और गंभीर रहता है उतना न तो वह शिक्षा के विषय में रहता है और न ही अपने लक्ष्य के विषय में। वह चाहता है कि उसके जीवन में एक गर्लफ्रेंड यदि वह लड़का है तो या एक बॉयफ्रेंड यदि वह लड़की है तो हो यहाँ तक कि कई सारे हों। वह इसी में खो जाना चाहता है। उसे लगता है यही जीवन है और यही जीवन का अंतिम सुख है। वह इसके बिना अपने जीवन की कल्पना करना ही नहीं चाहता। उसमे सामर्थ्य ही नहीं है कि वह- डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम या श्री अटल बिहारी वाजपयी के विचारों को आत्मसात् कर सके।