Zindagi Ka Saath Nibhata Chala Gaya

About The Book

अब्दुल हई एक बच्चे का ऐसा नाम है, जिसे हम लोग नहीं जानते। बाद में यही बच्चा अपनी शायरी के दम पर शब्दों का जादूगर बन बैठा। वह गोरी हुकूमत के एक वफ़ादार सामंत का बेटा था लेकिन पिता उसे अनपढ़ बनाए रखना चाहते थे। उसकी माँ, पति की बारहवीं बीवी थी। उसने बग़ावत कर दी और शौहर की दौलत को ठोकर मार दी। बेटे को लेकर घर छोड़ दिया। मामला अदालत में गया और माँ की जीत हुई। उसने ज़ेवर बेचकर बेटे को पढ़ाया। इसी अब्दुल हई को हम आज साहिर लुधियानवी के नाम से जानते हैं। साहिर के शेर, नज़्में और ग़ज़लें हमें रुलाती हैं, हँसाती हैं और व्यवस्था के प्रति आक्रोश से भर देती हैं। उनके लफ़्ज़ अदब के एक ऐसे लोक में ले जाते हैं, जो नाइंसाफ़ी के विरोध में संसार से टकराने का हौसला रखते हैं और सच के लिए किसी भी हद तक सत्ता से टकराने के लिए तैयार हैं। लेकिन इसी साहिर के अपने रंज ओ ग़म भी कम न थे जिसे कम ही लोग जानते हैं। उनके सीने में दर्द का दरिया बहता था और हम परदे पर उनके गीतों पर झूमते थे। उनकी ज़िंदगी में एक के बाद एक महिलाएं आती रहीं और जाती रहीं मगर उसका घर नहीं बसा पाईं। उनके गीतों और ग़ज़लों में प्यार का सागर हिलोरें मारता था पर मन में दूर-दूर तक सन्नाटा और विकराल रेगिस्तान पसरा हुआ था। इसी सूनेपन को दिल में लिए शायरी का यह सुल्तान एक दिन हमेशा के लिए चला गया। साहिर लुधियानवी का संपूर्ण प्रामाणिक ज़िंदगीनामा पहली बार टीवी के जाने-माने बायोपिक निर्माता व निर्देशक राजेश बादल की इस पुस्तक में आप पढ़ने जा रहे हैं। साहिर की ज़िंदगी के क़िस्से टुकड़ों-टुकड़ों में आधी हक़ीक़त, आधा फ़साना की तरह हमें मिलते रहे और हम उन पर भरोसा करते रहे। क़रीब पंद्रह बरस के गहरे शोध के बाद साहिर की यह दास्तान आपके लिए प्रस्तुत है। हमारा दावा है कि इससे पहले साहिर की समग्र पुख्ता कहानी आपने नहीं पढ़ी होगी। सलाम! साहिर लुधियानवी।
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